पिछले लेख में हमने सीखा कि डीमैट अकाउंट क्या होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ डीमैट अकाउंट होने से आप शेयर खरीद या बेच नहीं सकते? इसके लिए आपको एक और अकाउंट की ज़रूरत होती है, जिसे ट्रेडिंग अकाउंट (Trading Account) कहते हैं।
आज मैं, राजवीर, आपको इन दोनों के बीच का अंतर एक ऐसे उदाहरण से समझाऊंगा जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे।
1. ट्रेडिंग अकाउंट क्या है? (What is Trading Account)
ट्रेडिंग अकाउंट वह प्लेटफॉर्म है जहाँ आप शेयर खरीदने या बेचने का ऑर्डर (Order) देते हैं।सरल शब्दों में, यह शेयर बाजार और आपके बीच का एक रास्ता है। जब आप अपने मोबाइल ऐप (जैसे Groww या Zerodha) पर ‘Buy’ या ‘Sell’ का बटन दबाते हैं, तो वह काम आपके ट्रेडिंग अकाउंट के ज़रिए होता है।
डीमैट खाता क्या है, इसका अर्थ, विशेषताएं, प्रकार, लाभ?(Demat Account Kya hai Aur Kaise Open Karen).
2. सबसे आसान उदाहरण: दुकान और गोदाम
इन दोनों के अंतर को समझने के लिए इस उदाहरण को देखें:
- ट्रेडिंग अकाउंट (दुकान): मान लीजिए आप एक दुकान पर जाते हैं। वहां आप सामान चुनते हैं और पैसे देकर उसे खरीदते हैं। दुकान वह जगह है जहाँ लेन-देन (Transaction) होता है।
- डीमैट अकाउंट (गोदाम/तिजोरी): दुकान से सामान खरीदने के बाद आप उसे अपने घर की तिजोरी या गोदाम में लाकर रख देते हैं। यह गोदाम ही आपका डीमैट अकाउंट है जहाँ सामान सुरक्षित रहता है।
मतलब: शेयर खरीदने के लिए ‘दुकान’ (ट्रेडिंग अकाउंट) चाहिए और शेयर को रखने के लिए ‘तिजोरी’ (डीमैट अकाउंट) चाहिए।
| फीचर | ट्रेडिंग अकाउंट (Trading Account) | डीमैट अकाउंट (Demat Account) |
| मुख्य काम | शेयर को खरीदना या बेचना। | शेयर्स को सुरक्षित स्टोर करना। |
| प्रकृति | यह एक ‘रास्ता’ (Interface) है। | यह एक ‘डिजिटल तिजोरी’ (Storage) है। |
| पैसे का लेनदेन | इसमें से पैसे कटते या जमा होते हैं। | इसमें सिर्फ शेयर्स आते-जाते हैं। |
4. यह प्रक्रिया काम कैसे करती है? (How it works step-by-step)
जब आप कोई शेयर खरीदना चाहते हैं, तो यह 3 स्टेप्स में होता है:
- पैसा: आप अपने बैंक अकाउंट से पैसा ट्रेडिंग अकाउंट में डालते हैं।
- खरीद: आप ट्रेडिंग अकाउंट में जाकर शेयर खरीदने का ऑर्डर देते हैं।
- स्टोरेज: शेयर खरीदने के 1-2 दिन बाद (जिसे T+1 या T+2 कहते हैं), वह शेयर आपके डीमैट अकाउंट में दिखने लगता है।
5. राजवीर की प्रो-टिप (Pro-Tip)
आजकल ज़्यादातर ब्रोकर (जैसे Groww, Zerodha) आपको “2-in-1 Account” देते हैं। इसका मतलब है कि जब आप अकाउंट खोलते हैं, तो आपका ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट एक साथ ही खुल जाता है। आपको इन्हें अलग-अलग मैनेज करने की टेंशन नहीं लेनी पड़ती।
1. डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट में अंतर
हाँ, ये दोनों अलग हैं।
ट्रेडिंग अकाउंट: इसका इस्तेमाल शेयर खरीदने और बेचने के लिए किया जाता है। यह आपके बैंक अकाउंट और स्टॉक एक्सचेंज के बीच एक पुल का काम करता है।
डीमैट अकाउंट: इसका इस्तेमाल शेयर को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। यह एक डिजिटल लॉकर की तरह है।
2. ट्रेडिंग अकाउंट में क्या आता है?
ट्रेडिंग अकाउंट मुख्य रूप से आपके पैसों के लेनदेन को संभालता है। इसमें शामिल हैं:
शेयर खरीदने और बेचने की सुविधा।
आईपीओ (IPO), म्यूचुअल फंड और बॉन्ड्स में निवेश।
आपके द्वारा खरीदे गए शेयर की लिस्ट और उनकी कीमत।
3. डीमैट खाता खोलने के नुकसान
डीमैट अकाउंट के कुछ छोटे खर्चे और रिस्क होते हैं:
सालाना फीस (AMC): आपको हर साल खाते को चालू रखने के लिए 200 से 500 रुपये देने पड़ सकते हैं।
अतिरिक्त चार्ज: शेयर बेचने पर ‘डीपी चार्ज’ (DP Charges) लगता है।
हैकिंग का डर: डिजिटल होने के कारण पासवर्ड सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है।
4. बिना डीमैट अकाउंट के इंट्राडे ट्रेडिंग
हाँ, आप बिना डीमैट अकाउंट के इंट्राडे ट्रेडिंग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपके पास ट्रेडिंग अकाउंट होना अनिवार्य है। चूंकि इंट्राडे में आप उसी दिन शेयर खरीदकर बेच देते हैं, इसलिए शेयर को जमा करने (डीमैट) की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, आजकल ज्यादातर ब्रोकर दोनों अकाउंट साथ में ही खोलते हैं।
5. एक आदमी कितने डीमैट अकाउंट खोल सकता है?
आप जितने चाहें उतने डीमैट अकाउंट खोल सकते हैं। इसकी कोई कानूनी सीमा नहीं है। बस ध्यान रहे कि आपको हर अकाउंट के लिए अलग-अलग सालाना फीस (AMC) देनी होगी।
6.ट्रेडिंग के 4 मुख्य प्रकार
(i)इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday): शेयर को एक ही दिन में खरीदकर बेचना।
(ii)स्कैल्पिंग (Scalping): बहुत कम समय (कुछ सेकंड या मिनट) के लिए शेयर खरीदना और छोटा मुनाफा लेकर निकल जाना।
(iii)स्विंग ट्रेडिंग (Swing): शेयर को कुछ दिनों या हफ्तों के लिए अपने पास रखना।
(iv)पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional): शेयर को महीनों या सालों के लिए निवेश के तौर पर रखना।
7.क्या मैं 500 रुपये से इंट्राडे शुरू कर सकता हूँ?
हाँ, बिल्कुल! आप 500 रुपये से भी शुरुआत कर सकते हैं। आप ऐसे शेयर चुन सकते हैं जिनकी कीमत कम हो (जैसे 50 या 100 रुपये वाले शेयर)।
8.क्या शेयर खरीदने के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है?
अगर आप शेयर को एक दिन से ज्यादा समय के लिए रखना चाहते हैं (इन्वेस्टमेंट के लिए), तो डीमैट अकाउंट जरूरी है। बिना इसके आप शेयर को अपने पास जमा नहीं रख सकते।
9.ट्रेडिंग में 3-5-7 नियम क्या है?
यह नियम सफल ट्रेडर बनने के सफर को बताता है:
3 साल: बाजार को समझने और खुद को नुकसान से बचाने में लगने वाला समय।
5 साल: लगातार मुनाफा (Profit) कमाने की कला सीखने में लगने वाला समय।
7 साल: ट्रेडिंग के क्षेत्र में एक्सपर्ट या मास्टर बनने का समय।
निष्कर्ष (Conclusion):
बिना ट्रेडिंग अकाउंट के आप ऑर्डर नहीं दे सकते, और बिना डीमैट अकाउंट के आप शेयर रख नहीं सकते। शेयर बाजार में निवेश करने के लिए ये दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
क्या आपको यह अंतर समझ आया? अगर आपके मन में अभी भी कोई सवाल है, तो नीचे कमेंट करें। मैं आपको और भी सरल उदाहरणों से समझाऊंगा!
This article is for educational and informational purposes only. It is not any investment advice. Before making any investment-related decision, make sure to consult your financial advisor.